Cytology – Basic fact and terminology

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Cytology – Basic fact and terminology

(कोशिका जीव विज्ञान- आधारभूत तथ्य और शब्दावली)

Cytology or Cell Biology जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत कोशिका तथा उसके अवयवों का अध्ययन किया जाता है| इसके अंतर्गत कोशिका, कोशिका अवयव, जैव अणु, कोशिका चक्र तथा कोशिका विभाजन का अध्ययन किया जाता है |
Father of Cytology – Robert Hook को कहा जाता है | इस आर्टिकल में कोशिका जीवविज्ञान से जुड़े हुए term’s का अध्ययन करेंगे |

Cell ( कोशिका )-

प्रत्येक जीवों का शरीर अनेक छोटी छोटी इकाइयों से मिलकर बना होता है, जिन्हें कोशिका कहते हैं | यह जीवों की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई होती है |
Cell की खोज – 1665 में रॉबर्ट हुक
Living cell की खोज- 1675 में ल्यूवेनहॉक

Cell-Orgenelles ( कोशिका अंगक )-

कोशिका के अंदर पाए जाने वाले अवयव जैसे Mitochondria ,Chloroplast, Golgy Complex आदि|
शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे बड़ी कोशिका है
माइकोप्लाजमा गैलिसेप्टिकम सबसे छोटी कोशिका है|

Cell Theory ( कोशिका सिद्धांत):-

सन 1838 में Schleiden तथा 1839 में Schwann के द्वारा कोशिका से संबंधित एक सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया ,जिसे कोशिका सिद्धांत कहा गया|
इस सिद्धांत के अनुसार-

  1. सभी जीव कोशिका और उनके उत्पादों के बने होते हैं|
  2. नई कोशिकाएं पूर्ववर्ती कोशिकाओं से बनती है|
  3. भी कोशिकाएं जीवन की कार्यात्मक तथा जीवन की कार्यात्मक तथा रचनात्मक इकाई होती है|
  4. किसी जीव में होने वाले सभी कार्य उसकी घटक कोशिकाओं में होने वाले विभिन्न जैविक क्रियाओं के कारण होते हैं|
  5. कोशिकाएं कार्य एवं अनुवांशिक इकाई (hereditary unit)होती है|
    कोशिका सिद्धांत के अपवाद- राइजोपस, cyanobacteria ,वाउचेरिया ,वायरस, जीवाणु आदि इसके अपवाद हैं|

Prokaryotic Cell (प्रोकैरियोटिक कोशिका)

ऐसी कोशिका जिसमें केंद्रक का अभाव होता है प्रोकैरियोटिक कोशिका कहलाती है| इसमें विभिन्न प्रकार के कोशिका अंगक अनुपस्थित होते हैं ,राइबोसोम को छोड़कर |
जैसे – जीवाणु कोशिका

BACTERIAL CELL

Eukaryotic cell ( यूकैरियोटिक कोशिका)-

ऐसी कोशिका जिसमें संगठित केंद्रक पाया जाता है ,तथा विभिन्न प्रकार की कोशिका अंगक उपस्थित होते हैं यूकेरियोटिक कोशिका कहलाती है |
जगत प्रोटिस्टा ,कवक ,प्लांटी तथा जंतु जगत में पाए जाने वाली कोशिका इसी प्रकार की होती है |

Microscope( सूक्ष्मदर्शी):-

सूक्ष्म वस्तु को देखने के लिए जिस उपकरण का उपयोग किया जाता है उस उपकरण को सूक्ष्मदर्शी कहा जाता है |
यह दो प्रकार के होते हैं प्रकाश सूक्ष्मदर्शी और इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी
एच.जेनसन और जेड. जेनसन के द्वारा सूक्ष्मदर्शी की खोज की गई |
नॉल एवं रस्का के द्वारा इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज की गई |

Cell Wall ( कोशिका भित्ति):-

कोशिका कला (plasma membrane) के चारों ओर अपेक्षाकृत अधिक मजबूत स्तर पाया जाता है , जिसे कोशिका भित्ति कहते है |
जंतु कोशिका में इसका अभाव होता है | पादप कोशिका में यहां सेलुलोज की बनी होती है जबकि कवक कोशिका में यहां chitin की बनी होती है |

Plasma membrane (कोशिका झिल्ली):-

प्रत्येक कोशिका का कोशिका द्रव्य एक पतली एवं प्रत्यास्थ झिल्ली के द्वारा घिरा रहता है, जिसे plasmmalemma , ectoplast अथवा प्लाज्मा झिल्ली के नाम से जाना जाता है | यह कोशिका एवं बाह्य वातावरण की आयनिक सांद्रता पर नियंत्रण रखने का कार्य करती है|

Cytosome ( साइटोंसोम):-

कोशिका भित्ति के अंदर उपस्थित समस्त संरचनाओं जैसी कोशिका कला (cell membrane)एवं आधार द्रव्य (Matrix) जीवद्रव्य (protoplasm)को सम्मिलित रूप से साइटोक्रोम कहा जाता है i

जीवद्रव्य (protoplasm) –

जीवो की कोशिका में कोशिका कला के अंदर एक मटमैला, पारभासी चिपचिपा एवं जेली के समान द्रव भरा रहता है जिसे जीवद्रव्य (protoplasm) कहते हैं |
हक्सले के द्वारा इसे जीवन का भौतिक आधार कहा गया है |
Trophoplasm ( ट्राफ़ोप्लाज्मा )- कोशिका द्रव का वह भाग जिसमें metabolically active कोशिकांग पाए जाते हैं | example- mitochondria, ribosome ,lysosome, centriole आदि|

CHROMOSOME

Cytoplasm ( कोशिका द्रव्य):-

प्लाज्मा झिल्ली तथा केंद्रक झिल्ली के बीच में पाए जाने वाले द्रव को साइटोप्लाज्म कहा जाता है , इसमें विभिन्न प्रकार के कोशिका अंगद पाए जाते जाते पाए जाते जाते कोशिका अंगद पाए जाते जाते हैं|

Mitochondria(माइटोकॉन्ड्रिया)

यहां तंतुवत अथवा कणिका के समान कोशिका द्रव्य कोशिकांग है ,जिसे कोशिका का विद्युत ग्रह के नाम से जाना जाता है | प्रकाश सूक्ष्मदर्शी में देखने पर यह छोटे धागेनुमा संरचना के रूप में दिखाई देता है | इसी कारण इसे माइटोकांड्रिया नाम दिया गया है |
माइट्रोकांड्रिया को सर्वप्रथम कोलीकर ने देखा था , जबकि अल्टमान के द्वारा इसे बायोप्लास्ट नाम दिया गया जबकि Benda ने इसे माइट्रोकांड्रिया कहा |
यह ऊर्जा उत्पन्न करने का कार्य करता है , इसी कारण इसे पावर हाउस ऑफ सेल के नाम से जाना जाता है |


Plastid ( लवक )-

लवक बड़े आकार के कोशिकांग है, जो कि पादप कोशिका एवं कुछ प्रकाश संश्लेषण करने वाले प्रोटिस्ट की कोशिका द्रव्य में बिखरे रहते हैं | प्लास्टिक शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ए एफ डब्ल्यू सिमपर के द्वारा किया गया था

यह दो प्रकार का होता है leucoplastids and Chromoplastids |


Chloroplast-

क्लोरोप्लास्ट पौधों की हरी पत्तियों एवं हरे भागों में पाए जाने वाले हरे वर्णक होते हैं जो कि सूर्य प्रकाश की की प्रकाश की सूर्य प्रकाश की की प्रकाश की कि सूर्य प्रकाश की की प्रकाश की सूर्य प्रकाश की की सौर ऊर्जा का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा उसे रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है | इसके अंदर क्लोरोफिल पाया जाता है जिसमें मैग्नीशियम अणु अणु होता है |

Endoplasmic reticulum :-

यहां कोशिका के मैट्रिक्स में एक झिल्ली तंत्र के रूप में पाया जाता है| जिसके द्वारा मैट्रिक्स अनेक कक्षों तथा उप कक्षों में बटा रहता है |यह double membrane वाला कोशिकांग है जो कि प्रोकैरियोटिक कोशिका एवं परिपक्व एस्ट्रोसाइट्स के अतिरिक्त सभी प्रकार की कोशिकाओं में पाया जाता पाया जाता है |

Ribosome-

राइबोसोम गोलाकार , कणिका के समान , राइबोन्यूक्लियोप्रोटीन से बना सबसे छोटा तथा अत्यधिक मात्रा में पाए जाने वाला कोशिकांग है इसे सबसे पहले ब्राउन एवं रॉबिंसन के द्वारा पादप कोशिकाओं में देखा गया था |
यह दो प्रकार का होता है 70s और 80s
यह प्रोटीन संश्लेषण का कार्य करता करता है |

Golgi body ( गॉल्जीकाय )-

इसकी खोज Camiliyo Golgy के द्वारा उल्लू की तंत्रिका कोशिकाओं में की गई थी | यहां एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम से जुड़ा हुआ गुच्छा के रूप में पाए जाने वाला कोशिकांग है |


Lysosome –

जंतु कोशिका और तथा कुछ पादप कोशिकाओं में पाया जाने वाला यह कोशिकांग है जिसे आत्महत्या की थैली के नाम से भी जाना जाता है ,क्योंकि इसके अंदर पाचक एंजाइम भरे होते हैं |

Centriole (सेंट्रियोल)-

सभी जंतु कोशिका तथा कुछ flagellate plants में चलाएंमान , जनन कोशिकाओं तथा कम विकसित स्थलीय पौधों की कोशिकाओं में , केंद्र के बाहर परंतु उसके समीप गॉल्जीकाय से लगी कला विहीन कणिका के समान संरचना पाई जाती है , जिसे सेंट्रियोल कहते हैं |
इसकी खोज वन बैंडन के द्वारा की गई | यह कोशिका के समय spindle fibres का निर्माण करता है |

Vacuoles ( राजधानी) :-

कोशिका द्रव में अर्ध पारगम्य झिल्ली युक्त अनेक रिक्त स्थान पाए जाते हैं ,जिन्हें Vacuoles कहते हैं इनके चारों तरफ की झिल्ली को Vacuoles membrane या टोनोप्लास्ट कहते हैं | यहां लाइपो प्रोटीन की बनी होती है | यह भोज्य पदार्थों का संग्रहण करने का कार्य करते हैं |

Nucleus ( केंद्रक )-

कोशिका द्रव में दबी हुई गोल, वृत्ताकार ,अंडाकार ,तस्करीनुमा या लंबी चपटी एक संरचना पाई जाती है जिसे Nucleus ( केंद्रक ) कहते हैं |इसे कंट्रोलर ऑफ द सेल भी कहा जाता है क्योंकि यहां कोशिका में होने वाले सभी कार्यों पर नियंत्रण रखने का कार्य करती है |
केंद्रक की खोज रॉबर्ट ब्राउन के द्वारा की गई थी |

NUCLEUS

Nucleolus ( नाभिका या केंद्रिका):-
केंद्र के अंदर एक गोलाकार संरचना पाई जाती है जिसे नाभिका या केंद्रिका कहा जाता है | यह राइबोसोमल आरएनए का संग्रह का संग्रह आरएनए का संग्रह का संग्रह तथा राइबोसोम का निर्माण करती है|

Chromosome ( गुणसूत्र )-

Nucleus ( केंद्रक )के अंदर अनेक धागे नुमा संरचनाएं संरचनाएं पाई जाती है जिन्हें गुणसूत्र कहा जाता है यहां अनुवांशिक लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ले जाने का कार्य करता है प्रत्येक जीव में गुणसूत्रों की संख्या एक निश्चित संख्या होती है जैसे मनुष्य में 46 गुणसूत्र होते हैं गुणसूत्र की खोज वाल्डेयर के द्वारा की गई है |


Centromeres –

chromatid गुणसूत्र में एक स्थान पर आपस में जुड़े होते हैं इस स्थान को Centromeres कहा जाता है | इसका निर्माण ट्यूबलीन प्रोटीन के द्वारा होता है |


Cell Cycle (कोशिका चक्र )-

एक कोशिका विभाजन के अंत तथा दूसरे कोशिका विभाजन के समापन में लगने वाले समय को कोशिका चक्र कहते है |
कोशिका चक्र की दो अवस्थाएं होती है-
अंतरा अवस्था (interphase)
तथा कोशिका विभाजन की अवस्था |

  1. अंतरा अवस्था (interphase)- दो क्रमिक विभाजन के मध्य लगने वाले समय अंतराल को ही अंतरा अवस्था (interphase) कहते हैं या हम कह सकते हैं कि telophase की समाप्ति से लेकर दूसरे prophase के मध्य आने वाली अवस्था को ही अंतरा अवस्था कहते हैं | इसकी तीन अवस्थाएं होती हैं G1 प्रावस्था, निर्माण कारी प्रावस्था (s phase), G2 प्रावस्था |

2. M Phase ( विभाजन अवस्था ) – इसे Mitotic या समसूत्री विभाजन की प्रावस्था भी कहते हैं | इस अवस्था में ही कोशिकाओं का विभाजन होता है और एक कोशिका से दो कोशिकाएं बनती है | इस अवस्था में लगभग 1 घंटा या संपूर्ण कोशिका चक्र का 5 से 10% समय लगता है |
एम प्रावस्था में दो अवस्थाएं होती हैं जिन्हें
केरियोकाइनेसिस तथा साइटोकाईनेसिस कहते हैं |
कोशिका विभाजन निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है-

  1. असूत्री कोशिका विभाजन,
  2. समसूत्री कोशिका विभाजन और
  3. अर्धसूत्रीविभाजन
    Amitosis Cell Division (असूत्री कोशिका विभाजन ) – ऐसा कोशिका विभाजन जिसमें केंद्रक का सीधा विभाजन खाँच निर्माण या संकुचन विधि के द्वारा होता है तथा केंद्र के विभाजन के दौरान तर्कु तंतुओं एवं गुणसूत्रों का निर्माण नहीं होता है उसे असूत्री विभाजन कहते हैं |
    इस प्रकार का कोशिका विभाजन कुछ शैवालों, कवकों तथा कुछ प्रोटोजोअन में पाया जाता है |

Mitosis Cell Division (सूत्री कोशिका विभाजन ) :– ऐसा कोशिका विभाजन जिसमें बनने वाली कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या अपने जनक कोशिका के बराबर होती है, समसूत्री कोशिका विभाजन कहलाता है | इस प्रकार का विभाजन दैहिक कोशिकाओं में होता है |
समसूत्री कोशिका विभाजन को सर्वप्रथम फ्लेमिंग ने जंतु कोशिकाओं में देखा था जबकि वनस्पति कोशिकाओं में इस विभाजन का अध्ययन सर्वप्रथम स्ट्रास बर्गर के द्वारा किया गया था |
यह भी मुख्य रूप से दो प्रावस्था में संपन्न होता है |
Interphase तथा M-Phase – इसे दो भागों में बांटा जा सकता है
केरियोकाइनेसिस -( prophase, metaphase, anaphase, telophase )
तथा साइटोकाईनेसिस |

Meiosis Cell Division (अर्धसूत्रीविभाजन)- ऐसा कोशिका विभाजन जिसमें बनने वाली कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या अपने जनक कोशिकाओं से आधी हो जाती है, अर्धसूत्री कोशिका विभाजन कहलाता है | इस प्रकार का कोशिका विभाजन जनन कोशिकाओं में संपन्न होता है | युग्मकों का निर्माण इसी विभाजन द्वारा होता है|
विजमैन के द्वारा अर्धसूत्री कोशिका विभाजन की खोज की गई जबकि फार्मर एवं मूरे के द्वारा मियोजित शब्द का प्रयोग किया गया है |
क्रॉसिंग ओवर, chiasma का निर्माण इसी विभाजन की अवस्थाओं में होता है |

Mitosis Poison ( समसूत्री विष )-

प्रकृति में बहुत से पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो कि समसूत्री कोशिका विभाजन को अवरुद्ध कर देते हैं इस प्रकार के पदार्थों को समसूत्री विष कहते हैं |जैसे कोल्चिसिन, मस्टर्ड गैस आदि |

Biomolecule ( जैव अणु ):-

Biomolecule ( जैव अणु )किसी कोशिका के अंदर पाए जाने वाले समस्त प्रकार के रासायनिक अणुओ को Biomolecule ( जैव अणु ) कहा जाता है | जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड, डी एन ए, आर एन ए, एमिनो एसिड आदि |.

Carbohydrates :-

ऐसे कार्बनिक योगिक जिनका जल अपघटन किए जाने पर पॉलीहाइड्रोक्सी एल्डिहाइड या पॉलीहाइड्रोक्सी कीटोंन देते हैं, कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं |
ये मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं
मोनो सेकेराइड्स, ओलिगो सेकेराइड्स पालीसेकेराइड्स.
कार्बोहाइड्रेट को ऊर्जा प्रदान करने का कार्य करते है |


Protein ( प्रोटीन):-

प्रोटीन एमिनो एसिड से मिलकर बने हुए जटिल कार्बनिक अणु होते हैं जो कोशिकीय अवयवों को बनाने का कार्य करती है |
ये तीन प्रकार के होते हैं-
सरल प्रोटीन -ग्लोबिन, केरेटिन,
संयुक्त प्रोटीन – हिमोग्लोबिन,फास्फोप्रोटीन, ग्लाइकोप्रोटीन etc.
व्यत्पन्न प्रोटीन-पेप्टोन

Nucleic Acid ( नाभिकीय अम्ल)-

नाभिकीय अम्ल उच्च अणु भार वाले अनुवांशिक पदार्थ होते हैं, जो अनुवांशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ले जाने का कार्य करते हैं |
यह मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है – डी एन ए और आर एन ए |

Enzyme (प्रकिण्व )-+

कोशिकाओं के अंदर होने वाली जैव रासायनिक अभिक्रिया को प्रेरित करने का कार्य करने वाले जैव अणु होते हैं| यह प्रोटीन से मिलकर बने होते हैं |

Lipid (लिपिड ) – शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले पोषक पदार्थ होते हैं, जो कार्बोहाइड्रेट की तुलना में दुगनी ऊर्जा प्रदान करते हैं |
यह भी तीन प्रकार के होते हैं
सरल लिपिड
संयुक्त लिपिड
व्यत्पन्न लिपिड

सारांश –

कोशिका जीव विज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण शब्दावली उनको इस लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया गया |
उम्मीद करूंगा यह आलेख आपको पसंद आएगा अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में जरूर दें ताकि अन्य लेख को और अधिक बेहतर बनाया जा सके |

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